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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 3, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

यदेवाम्भस्तदेवान्तर्द्रवत्वमपृथग्यथा । चित्त्वमेव तथा चित्तं तद्रूपत्वात्तदर्थयोः ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

जो जल है वही उसके अन्तर्गत द्रवत्व भी है । इसी तरह से चिति के अन्तर्गत विद्यमान चित्तव एवं चित्त चिति से पृथक्‌ नहीं है, क्योकि चित्त्त और चित्त शब्द के जो अर्थ हैं, वे केवल चैतन्यवाचक चितिधातुके ही अर्थ हैं