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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 3, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

परिशान्तमतेर्ज्ञस्य स्वप्नेऽप्यप्राप्तमानवा । निर्मला वितता हृद्या हृद्येव वनभूमिका ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

परिशान्तमति तत्त्वज्ञानी पुरुष के लिए स्वप्न में भी निर्जन, निर्मल, विस्तृत और अति मनोहर वन भूमि हृदय के अन्दर ही विराजमान है