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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 3, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

ज्ञस्य निर्वाणदृश्यस्य निस्पन्दार्था नभोमयी । शान्ताशेषविशेषार्था जगदेव महाटवी ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

ज्ञानाग्नि से दग्ध हुए दृश्य प्रपंचवाले तत्त्वज्ञानी के लिए यह संसार ही स्पन्दन से शून्य, आकाशमयी, अशेष-विशेष पदार्थों से शून्य महाटवी है