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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 3, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

शुभाशुभात्मकर्म स्वं नाशनीयं विवेकिना । तन्नास्तीत्यवबोधेन तत्त्वज्ञानेन सिध्यति ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

इतत प्रकार के ज्ञानरुप व्यवहार से ही ज्ञानी को पूर्वोत्तर शुभाशुभ कर्मो का सम्बन्ध नहीं होता ओर उनका विनाश भी हो जाता है, यह कहते हैं । विवेकी पुरुष को अपना शुभाशुभ कर्म विनष्ट कर देना चाहिए। यह विनाश “शुभाशुभ कर्मों का आत्मा के साथ तनिक भी किसी समय सम्बन्ध नहीं है", इस प्रकार के बोधरूप तत्त्वज्ञान से स्वयं सिद्ध हो जाता है