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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 31, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

यावत्त्वस्य न निर्वाणं परिपोषमुपागतम् । तावद्व्यवहरत्यस्तरागद्वेषभयोदयः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

जब तक उस ज्ञानी की सप्तम भूमिका में विश्रान्ति परिपोषता को यानी दृढता को प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक राग-द्रेष ओर भय के उदय से रहित हो वह व्यवहार करता है