Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 31, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
वीतरागभयक्रोधो निर्वाणः शान्तमानसः ।
शिलेवाप्यशिलीभूतो मुनिस्तिष्ठति नित्यशः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
सप्तम भूमिका में प्राप्त
ज्ञानी रागद्वेष भय और क्रोध से शून्य, निर्वाणरूप, शान्तमन पर पत्थररूप न बना हुआ भी
पत्थर की नाई नित्य निश्चल स्थित रहता है