Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 32, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
नाहमित्येव निर्वाणं किमेतावति मूढता ।
सत्संगमविचाराभ्यामेतदाश्ववगम्यते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकार आदि की सत्ता का त्रैकालिक अभाव ही मोक्ष है, अतः इतने को लेकर मूढता का
अवलम्बन क्यों किया जाय ? इसका परिज्ञान सत्संग ओर अभ्यास से तत्काल ही किया जा
सकता है