Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 33, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
अजितात्मा जनो मूढो रूढो भोगैककर्दमे ।
आपदां पात्रतामेति पयसामिव सागरः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसने अपने
मन के ऊपर विजय पाई नहीं है, भोगरूपी कीचड़ में फँसा हुआ वह मूढ़ पुरुष आपत्तियों का ऐसे
पात्र बन जाता है, जैसे जलों का समुद्र