Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 33, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
जीवितस्य यथा बाल्यं दृष्टं प्राथमकल्पिकम् ।
निर्वाणस्य तथा भोगसंत्यागो रागशान्तिदः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आयु की सबसे पहली सीढ़ी बाल्यावस्था
दिखाई पड़ती है, वैसे ही मोक्ष की पहली सीढ़ी रागों से शान्ति देनेवाला भोग त्याग ही है