Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 33, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
संविद्विकासपयसो बुद्बुदः सर्गविभ्रमः ।
अहमित्यादिसद्भावविकाराकाररूपवान् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा की बर्हिमुखतारूप जो जल है, उसी का यह जगत्भ्रम एक
तरह से बुदबुद है और उसमें जो रूप है, वह अहंकार आदि सद्रूप भावविकारों के आधारों से ही
आया है