Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
बीजमन्तर्यथा वेत्ति स्वरूपं पल्लवादिकम् ।
तथा महाचिदन्तस्थं स्वरूपं वेत्ति सर्गताम् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
द्वेतवर्शन ही सृष्टिकप हैं, यह दरष्टान्तों से प्रतिपादन करते है/
जैसे बीज अपने भीतर पल्लव आदि स्वरूप का परिज्ञान करता है, वैसे ही महाचैतन्यरूप ब्रह्म
अपने भीतर सृष्टिरूप स्वरूप का अनुभव करता है