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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

यथा भावविकाराभाश्चित्पराः सर्गतास्तथा । सर्वे बीजानि दृष्टान्तास्तद्रूपा एव तन्मयाः ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

वृक्ष के छः भावविकार भी यहाँ द्ष्टान्त हैं; यह कहते हैं / जैसे चैतन्य के आश्रित भावविकारों के क्रमिक प्रतिभास ही सृष्टिरूप हैं, वैसे ही सभी बीज दृष्टान्त है, अतः बीज आदिरूप से स्थित चैतन्य के ही विकाररूप होने के कारण सृष्टियाँ तन्मय हैं