Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
निर्विकारपरब्रह्ममयं सर्वमिदं जगत् ।
निर्विकारमनाद्यन्तमेवं विद्धि निरामयम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, निर्विकार परब्रह्ममय ही यह सब जगत् है, अत: विकाररहित, आदि-अन्त
शून्य निरामय चिति ही सब कुछ है, यह आप जानिये