Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
शून्यत्वाकाशयोर्भेदो यादृशोऽवगतस्त्वया ।
भेदं निरात्मकं विद्धि तादृशं ब्रह्मसर्गयोः ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, शून्यता ओर आकाश का भेद जैसा आपने तुच्छ जाना, ब्रह्म
और जगत् का भी भेद वैसा ही तुच्छरूप जानिये