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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 35, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

अनहं सोऽहमिव तदनाशमिव नाशवत् । अकलङ्कं कलङ्कीव निर्वेद्यं वेद्यवाहिवत् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

अहंकाररहित होने पर भी अहंकारसहित के समान, अविनाशी होने पर भी नाशवान्‌ के सदृश, कलंकशून्य होने पर भी कलंकयुक्त के समान, विषयरहित होने पर भी विषयसहित के तुल्य वह ब्रह्म भासता है