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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 35, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

अविभागं विभागीव निर्जाड्यं जडवद्गतम् । अचेत्यं चेत्यभावीव निरंशं सांशशोभनम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

विभागशून्य होने पर भी वह भागसहित के तुल्य, जाड्यरूपता को न प्राप्त होने पर भी वह जड़ के समान, विषयों से शून्य होने पर भी वह विषयभाव को प्राप्त हुए के समान, अंशशून्य होने पर भी वह अंशयुक्त के समान सुशोभित दीखता है