Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 35, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

अविकारं विकारीव समं शान्तमशान्तवत् । सदेवासदिवादृश्यं तदेवातदिवोदितम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

विकारशून्य होने पर भी वह विकारी के समान, शान्त ओर समरूप होने पर भी वह अज्ञान के कारण अशान्त तथा असम के समान सा, सत्‌ होने पर भी वह चक्षु आदि से देखने के अयोग्य होने के कारण असत्‌ के सदृश एवं तद्रूप होने पर भी वही ब्रह्म अतद्‌-रूप-सा उदित जान पड़ता है