Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 35, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अणीयसामणीयांसं स्थविष्ठं च स्थवीयसाम् ।
गरीयसां गरिष्ठं च श्रेष्ठं च श्रेयसामपि ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त सूक्ष्म पदार्थों में वह अत्यन्त सूक्ष्म है, स्थूल पदाथों में वह सबसे अत्यन्तस्थूल है, वजनदार
पदाथा में वह सबसे बढ़कर वजनदार है तथा श्रेष्ठ जितने पदार्थ हैं उन सबमें भी वह सबसे बढ़कर
श्रेष्ठ है