Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 35, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अदेशकालावयवोऽप्येष देवो दिवानिशम् ।
असज्जगत्तनोतीव यथा वारितरङ्गकम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
देश-कालादि के अवयवों से रहित भी यह चिद्रूप देव-
रात-दिन असद्रूप जगत् का ऐसे विस्तार करता-रहता है, जैसे कि जल तरगों का