Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 35, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
एष स्वप्रतिबिम्बस्य स्वयमालोकनेच्छया ।
अत्यन्तनिर्मलाकारः स्वयं मुकुरतां गतः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त निर्मल आकारवाला चिद्रूप यह परमात्मा स्वयं अपना
प्रतिबिम्ब (वर्णित जीवजगत् स्वरूप दूसरा आकार) देखने की इच्छा से दर्पणरूपता को प्राप्त हो
गया है