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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 35, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

एतद्रूपा पदार्थश्रीरेतस्मिन्नेतदिच्छया । चमत्करोत्येतदर्थं जिह्वेव स्वास्यकोटरे ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

अब इसीका विस्तारपूर्वक वर्णन करते हैं / इस चितिरूप आत्मा में इस चिति की ही इच्छा से चितिरूप पदार्थों की शोभा अपने ही लिए ऐसे चमत्कार कर रही है, जैसे जीभ अपने मुखरूप कोटर में