Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
काकतालीययोगेन परप्रेरणयानया ।
यदि किंचित्कदाचिच्च सम्यगिच्छति वा न वा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
काकतालीय योग
से यानी आकस्मिक घटना से या अन्य किसी की प्रेरणा से यदि कदाचित् कुछ इच्छा करता
भी है, तो फिर वह देहमात्रधारण में साधनभूत शास्त्रों से अनिषिद्ध अन्न आदि की कुछ इच्छा
करता है या नहीं भी करता है