Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
इच्छानां तानवं यस्य दिनानुदिनमागतम् ।
विवेकशमतृप्तस्य तमाहुर्मोक्षभागिनम् ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, जिस महामति को दिन-पर-दिन
समस्त इच्छाओं की कमी होती जाती है, विवेक-शम से सन्तुष्ट उस महामति को ही तत्त्वज्ञलोग
मोक्षभागी कहते हैं