Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
प्राणबुद्ध्यादयः सत्तां भावनावशतो गताः ।
भावना चिच्चमत्कारः स यथेच्छमुदेति च ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
भावनामात्र से कल्पित होने के कारण प्राण आदि भेद निथ्या हैं. यह कहते हैं ।
भद्र, प्राण, बुद्धि आदि जो कुछ अपना अस्तित्व रखते हैं, वह केवल भावना के बल पर ही ।
भावना तो एक चिति का चमत्कार है, वह इच्छा के अनुसार उदित होता है, अतः भावनामूलक
प्राण आदि मिथ्या हैं