Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
पङ्कता कल्पिता व्योम्नो या पुत्रकपताकिनी ।
सा यथा शान्ततामात्रं खमेवेदं तथा जगत् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश में कल्पित मलिनता और उसी में कल्पित
गन्धर्वपुत्रों की सेना जैसे आकाशरूप ही है, वैसे ही ब्रह्म मे कल्पित यह सारा जगत् एकमात्र
शान्त ब्रह्मरूप ही है