Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 39, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
तैलबिन्दुर्भवत्युच्चैश्चक्रमप्पतितो यथा ।
तथाशु चेत्यसंकल्पे स्थिता भवति चिज्जगत् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे तेल का बिन्दु जल में गिरकर
नाना वर्णो के चक्ररूप में परिणत हो जाता है वैसे ही विषयों के संकल्प मेँ स्थित चिति तत्काल ही
जगद्रूप मे परिणत हो जाती है