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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 41, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 41, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

हेमपीठमिवानेकभविष्यत्संनिवेशवत् । लक्ष्यमाणमपि स्फारं शान्तमव्ययमास्थितम् ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसमें भविष्य में होनेवाली अनेक तरह की नूतन-नूतन रचनाएँ विद्यमान हैं ऐसे चौकोन (चतुष्कोण) सुवर्णपिण्ड के समान अनेक तरह के विस्तारो से परिपूर्ण दिखाई दे रहा भी यह जगत्‌ शान्त अविनाशी ब्रह्मरूप ही है