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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 42, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

यत्नो विवेकशब्दाख्यो भवत्यात्मप्रसादतः । तथा तथा विवेकोऽन्तर्वृद्धिं नेयः शमामृतैः ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

अपने भीतर शमरूपी अमृत से विवेक को ऐसे धीरे-धीरे बढाना चाहिए, जैसे कि विषयभरान्तियों से वह फिर नष्ट न होने पावे