Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 43, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
भूयतां चिन्मयव्योम्ना पीयतां परमो रसः ।
स्थीयतां विगताशङ्कं निर्वाणानन्दनन्दने ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
अब भगवान् वस्निष्ठजी सबके प्रति दया से हितकारक बातें उद्घोषित करते हुए उपदेश
देते हैं /
हे सज्जनो, आप सबके सब चिन्मय आकाश हो जाइये, परम रस का निरतिशयानन्द का पान
कीजिये तथा निर्वाणरूप नन्दनवन में सभी आशंकाओं से शून्य हो स्थित रहिये