Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 43, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
जगत्त्रयमरीच्यम्बु विप्रलब्धान्धबुद्धयः ।
मा धावत गतव्यग्रमाशयोपह्रताशयाः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे त्रिलोकीरूपी मृगतृष्णाजल से ठगे गये अतएव नष्टबुद्धि जीवों,
आप लोग तृष्णा से चंचलहृदय होकर व्यग्रतापूर्वक इधर-उधर मत दौडते फिर