Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 43, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
अविज्ञातस्य बालस्य पदार्था यादृशा इमे ।
विदुषस्तादृशा एव तिष्ठतः क्षीणवासनम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
इस संसार के निर्विकल्प का अनुभव कच्चे को भी होता है, उसका साम्य दिखलाते हैं ।/
जिस बच्चे को अभी विशेष ज्ञान नहीं हुआ है उसको ये संसार के पदार्थ जिस तरह के भासते
हैं, ठीक उसी तरह के ये सभी संसार के पदार्थ वासनाशून्य स्थित विद्वान् को भासते हैं