Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, Verse 66

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 43, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 66

संस्कृत श्लोक

चिता चेत्यतयात्मैव स्वचित्तीक्रियते तथा । देशकालं विनैवात्मा बोधाबोधेन चित्तताम् ॥ ६६ ॥

हिन्दी अर्थ

बोधरूप आत्मा के अज्ञान से ही देश, काल आदि सामग्री के बिना यह अज्ञानी आत्मा चित्तरूप बन गया है। वस्तुतः उक्त तर्को से यह आत्मा एक ही स्थित है