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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

इति संरक्षितादस्माद्ध्यानबीजात्प्रवर्तते । आभिजात्योन्नतः श्रीमान्विवेकाख्यो नवाङ्कुरः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह से रक्षित इस ध्यान के बीज से विवेकनामक नवीन अंकुर उत्पन्न होता है, जो अत्यन्त पुष्ट ओर सौन्दर्य की अधिकता से उन्नत एवं श्रीसम्पन्न रहता है