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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

स्तम्भमेष निबध्नाति स्थैर्यं नाम समुन्नतिम् । संतोषत्वग्विवलितं वैराग्यरसरञ्जितम् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

आगे चलकर यह अंकुर सन्तोषरूप त्वचा से वेष्टित तथा वैराग्यरूपी रससे रंजित हो काण्ड, दृढमूलता और अपनी ऊँचाई को ग्रहण करता है