Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

अथ तस्मात्प्रजायन्ते विज्ञानालंकृताकृतेः । लता रसविलासिन्य इमा विततदेशगाः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर विज्ञान से अलंकृत आकारवाले उस विवेक से आत्मरस से विलास करनेवाली एवं बहुत दूर देश तक जानेवाली (५) ये लताएँ प्रादुर्भूत होती हैं