Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
स्फुटता सत्यता सत्ता धीरता निर्विकल्पता ।
समता शान्तता मैत्री करुणा कीर्तिरार्यता ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वात्मतत्त्व का स्पष्ट आविर्भाव, एकमात्र
उसीकी सत्यता, आत्मस्वरूप में स्थिति, धीरता, निर्विकल्पता, समता, शान्तता, मेत्री, करुणा,
कीर्तिं ओर आर्यता ये सब लताएँ उसी एक विवेकरूपी अंकुर से निकलती हैं