Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
लताभिर्गुणपत्राभिः स ध्यानतरुरूर्जितः ।
यशःपुष्पाभिरेताभिः पारिजातायते यतेः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
यशरूपी पुष्पों
तथा शान्ति आदि गुणरूपी पत्तों से शोभित इन लताओं से परिपुष्ट ध्यानरूप वृक्ष संन्यासी के लिए
पारिजात-सा बन जाता है कल्पवृक्ष हो जाता है