Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
स्वचित्तभूमौ पतितं ध्यानबीजं महाधिया ।
सेकैरमीभिर्यत्नेन संसेक्तव्यमखेदिना ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
अपनी चित्तरूप भूमि में गिरे हुए पूर्वोक्त वैराग्यरूपी
समाधिबीज को बढाने की इच्छा से दृढ़ बुद्धि रखनेवाले खेदशून्य पुरुष को निम्नलिखित जलो से
प्रयत्नपूर्वक निरन्तर उसे सींचते रहना चाहिये