Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 45, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
रागद्वेषभयोन्मादमानमोहमहत्तया ।
नटस्येवास्य दृश्यन्ते शीतलामलचेतसः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
दूसरों को खुश करना ही जिसमें प्रधान
कार्य हे ऐसी राग, द्वेष, भय, उन्माद, मान तथा मोह की महत्ता से नट के व्यवहार की नाई शीतल
तथा निर्मल चित्त इस ज्ञानी के सब व्यवहार दिखाई देते हैं