Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 45, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
संकल्पार्थपरित्यागाद्दिनानुदिनमातता ।
शुद्धस्वभावविश्रान्तिः परमार्थाप्तिरुच्यते ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, संकल्पित पदार्थों के परित्याग
से दिन-पर-दिन जो विस्तृत शुद्ध आत्मस्वभाव में विश्रान्ति होती है वही परमार्थ की प्राप्ति कही
जाती है