Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 45, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
आरोहति नरो वृक्षं तदास्वादयितुं फलम् ।
अन्यवर्गपरित्यागो वितताध्यवसायवान् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
बड़े भारी अध्यवसाय (प्रयत्न)
से भरा तथा अपने सब धर्मों को छोड़ देनेवाला यानी परमविरक्त पुरुष उक्त फल का स्वाद लेने
के लिए उस वृक्ष पर चढता है