Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
साधुसंगमशुद्धात्मा शास्त्रार्थपरिमार्जितः ।
प्राज्ञो भात्युद्धृतं वह्नेरग्निशौचमिवांशुकम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
साधुओं के
समागम से शुद्धवुद्धि हुआ तथा शास्त्र के अर्थो से परिमार्जित हुआ प्राज्ञ (विवेकी) पुरुष अग्नि से
निकाले गये विद्युत्पुंज के सदूश चमकदार वस्त्र रत्न की नाई भासता है