Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
न तादृशं जगत्यस्मिन्दुःखं नरककोटिषु ।
यादृशं यावदायुष्कमर्थोपार्जनशासनम् ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, यह बात आप निश्चित मानिये कि जीवनपर्यन्त
जैसा अर्थोपार्जन के लिए झेला गया दण्डरूप ऐहिक पारलौकिक दुःख है, वैसा दूसरा दुःख
इस जगत् में करोड़ों नरकों में भी विद्यमान नहीं है