Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 48, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
प्रसन्नः स महादेवः स्वयमात्मा महेश्वरः ।
बोधाय प्रेरयत्याशु दूतं पूतं शुभेहितैः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जब अनेक सत्कर्मों से वह महादेव, महेश्वररूप आत्मा स्वयं प्रसन्न हो जाता है, तब पूजक के
पास बोध देने के लिए अपना पवित्र दूत तत्काल भेजता है