Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 48, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
आत्मना परमेशेन को दूतः प्रेर्यते मुने ।
स दूतो बोधनं वापि करोति वद मे कथम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : हे मुने, परमेश्वररूपी आत्मा कौन दूत भेजता है, ओर वह आकर बोध
कैसे देता है, इसको मुझसे कहिए