Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 48, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
आत्मसंप्रेरितो दूतो विवेको नाम नामतः ।
हृद्गुहायां सदानन्दस्तिष्ठतीन्दुरिवाम्बरे ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : भद्र, आत्मदेव के द्वारा भेजा गया दूत, जिसका नाम विवेक
है ओर सदा आनन्द देनेवाला है, उक्त पुण्यवान् अधिकारी की हृदयगुहा में आकर, आकाश
में चन्द्रमा की नाई, स्थिर हो जाता है