Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 48, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
जपहोमतपोदानपाठयज्ञक्रियाक्रमैः ।
एष प्रसाद्यते नित्यं नरनागसुरासुरैः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
जप, होम, तप, दान
वेदपाठ, यज्ञ ओर क्रियाक्रमों से निरन्तर इसी आत्मा को नर, नाग, देवता ओर दानव प्रसन्न
करते हैं