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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 33

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 48, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

द्यौर्मूर्धा पृथिवी पादौ तारका रोमराजयः । भूतान्यस्थीनि हृदयं व्योमास्य परमेश्वरः ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

इसी परमपिता परमात्मा का द्यौ मस्तक है, पृथ्वी पैर है, तारे रोम हैं, भूत अस्थि हैं, आकाश हृदय है और यही सबका अन्तरात्मा है