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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

पूर्वोक्ताः सर्व एवैते उपदेशा विशेषणाः । ज्ञस्यानुभवमायान्ति स्वतः साधुकथा इव ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

वह कौन-सी युक्ति ह, यह [दिखलाते हुए उत युक्ति का फल ज्ञान है, यह बतलाते हैं। जिस अधिकारी पुरुष ने भूत, भविष्य और वर्तमान इस जगद्रपी अंग के जन्म को कार्य- कारणता आदि से विचार कर वाचारम्भण श्रुति में दिखलाये न्याय द्वारा स्थूल और सूक्ष्म प्रपंच से रहित परिशिष्ट सन्मात्र अखण्ड बोधरूप से जान लिया है वही सचमुच तत्त्वज्ञानी है तथा उस द्वैतशून्य उपशान्त ज्ञानी पुरुष की दृष्टि में यह संसार है ही नहीं ॥१७.१८॥ सभी उपदेशों का, जो तत्‌-तत्‌ अलभावनाश के व्यावर्तक हैं; उतर तरह के अनुभव में ही पर्यवसान है, यह कहते हैं / हे श्रीरामचन्द्रजी, पूर्वोक्त ये सभी मेरे विशेष रूप से उपदेश, साधु पुरुषों की कथा की तरह, ज्ञानी के अनुभव में स्वतः आ जाते हैं