Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
औदार्योदारमर्यादां मतिं गाम्भीर्यसुन्दरीम् ।
महतां नावगाहन्ते भुवनानि चतुर्दश ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी महत्ता का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हैं /
औदार्य की सर्वश्रेष्ठ अवधिभूत तथा गाम्भीर्य गुण से अति सुन्दर महात्माओं की बुद्धि को
चौदह भुवन तथा उनके सभी प्राणी एवं वहाँ की सारी सम्पत्तियाँ भी लुब्ध नहीं कर सकतीं